पिता अपनी बेटी को आत्मनिर्भर और साहसी बनना सिखाते हैं।
उनकी बातें सुनें, चाहे वे कितनी भी छोटी क्यों न हों।
कुछ दिनों बाद, रामेश्वर ने अंजलि और लड़के की सगाई कर दी। अंजलि के लिए यह एक नया अनुभव था, लेकिन वह अपने पिता के फैसले पर भरोसा करती थी।